भोपाल… सुबह का वक्त। सड़क पर आम दिनों जैसी हलचल तो थी, लेकिन माहौल कुछ अलग था। दूर-दूर तक ट्रैक्टरों की कतार, किसानों के चेहरे पर उत्साह और बीच में एक ऐसा दृश्य, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद ट्रैक्टर चलाते नजर आए। सामने 1101 ट्रैक्टरों का काफिला और संदेश एकदम साफ— किसान सिर्फ भाषणों में नहीं, सरकार की प्राथमिकता में है।
जब राजधानी की सड़कों पर बदला सियासी दृश्य
CM Mohan Yadav tractor rally : आमतौर पर मुख्यमंत्री को हम मंच से संबोधन करते, फाइलों पर हस्ताक्षर करते या सभाओं में भाषण देते देखते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग थी। ट्रैक्टर की सीट पर बैठे मुख्यमंत्री, पास में विधायक रामेश्वर शर्मा और चारों ओर किसानों का हुजूम।
लोग रुक-रुककर मोबाइल से वीडियो बना रहे थे। सोशल मीडिया के लिए यह पल खास था और किसानों के लिए गर्व का। यह सिर्फ एक रैली नहीं थी, बल्कि एक ऐसा दृश्य था, जिसने सत्ता और खेत के बीच की दूरी को थोड़ा कम किया।

कृषक कल्याण वर्ष-2026: नाम नहीं, दावा बड़ा
इस ट्रैक्टर रैली के साथ ही सरकार ने ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ का औपचारिक शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री का कहना साफ था—
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2026 का साल किसानों के लिए समर्पित रहेगा।
सरकार का दावा है कि आने वाले पूरे साल में खेती को फायदे का सौदा बनाने पर फोकस रहेगा। किसानों की आय बढ़ाने, लागत घटाने, नई तकनीक अपनाने और योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने की बात कही गई।
सरकारी मंच से यह भी कहा गया कि अब किसान सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की धुरी होगा।
भोपाल से क्यों हुई शुरुआत?
CM Mohan Yadav tractor rally : राजधानी भोपाल को इस कार्यक्रम के लिए चुना जाना भी अपने-आप में एक संदेश था। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आए किसान यहां जुटे। ट्रैक्टरों की संख्या 1101 रखी गई, ताकि यह आयोजन “सामान्य” न लगे, बल्कि यादगार बने।
किसानों का कहना था कि इस तरह का दृश्य उन्होंने पहले कम ही देखा है, जहां मुख्यमंत्री खुद ट्रैक्टर पर बैठकर उनके साथ सड़क पर उतरे हों।
राजनीति, संदेश या दोनों?
अब सवाल उठना लाजमी है— क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक संदेश है?
राजनीति अपनी जगह है, लेकिन तस्वीरें कुछ और कहानी कहती हैं। मुख्यमंत्री का ट्रैक्टर चलाना प्रतीकात्मक जरूर है, लेकिन इसका असर भावनात्मक है। किसानों को यह महसूस हुआ कि सरकार सिर्फ फाइलों में नहीं, उनके बीच भी मौजूद है।
हालांकि असली परीक्षा आने वाले समय में होगी— जब किसान अपनी फसल बेचने जाएगा, जब लागत बढ़ेगी या मौसम मार करेगा। तब ये घोषणाएं कितनी काम आएंगी.
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किसानों की उम्मीदें और सवाल
रैली में शामिल कई किसानों का कहना था कि उन्हें उम्मीद है कि यह साल सिर्फ कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा।
उनकी मांगें साफ हैं-
- फसलों के सही दाम
- समय पर खाद-बीज
- सिंचाई और तकनीकी मदद
- और सबसे जरूरी, योजनाओं का ईमानदार क्रियान्वयन
किसानों का मानना है कि अगर ये वादे जमीन पर उतरते हैं, तो खेती की तस्वीर बदल सकती है।
News Nagaria की नजर से
मुख्यमंत्री मोहन यादव का ट्रैक्टर चलाना आने वाले दिनों में राजनीति और सोशल मीडिया—दोनों में चर्चा का विषय बना रहेगा। यह तस्वीर सरकार के इरादों का प्रतीक बन सकती है, लेकिन प्रतीक तभी मजबूत होता है, जब उसके पीछे ठोस काम दिखे।
कृषक कल्याण वर्ष-2026 एक बड़ा नाम है, अब चुनौती इससे भी बड़ी है— इसे किसानों की जिंदगी में असली बदलाव में बदलना।
