8 दिन से धरने पर आशा कार्यकर्ता, टीकाकरण ठप,ASHA protest UP

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आठ दिनों से जारी यह आंदोलन अब सिर्फ मांगों तक सीमित नहीं रहा है। आशा कार्यकर्ताओं के धरने से कन्नौज के तालग्राम क्षेत्र में टीकाकरण सेवाएं ठप पड़ गई हैं, जिससे नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं की सेहत पर खतरा मंडरा रहा है।

Kannauj | News Nagaria – शहर खबरों का

आशा कार्यकर्ताओं का धरना

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के तालग्राम में आशा (ASHA) स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा। लंबित मांगों को लेकर शुरू हुआ धरना आठवें दिन भी जारी है। प्रदर्शनकारियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के कोल्ड चेन रूम पर ताला डाल रखा है, जिससे क्षेत्र में टीकाकरण सेवाएं पूरी तरह बाधित हो गई हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं तक जरूरी टीके समय पर नहीं पहुंच पा रहे।

क्या हैं आशा कार्यकर्ताओं की मांगें?

आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि बकाया भुगतान, मानदेय में सुधार और अन्य लंबित मुद्दों पर कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन ठोस निर्णय नहीं हुआ। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने आंदोलन तेज कर दिया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता हवन-पूजन और वैदिक अनुष्ठानों के जरिए भी शासन का ध्यान खींचने की कोशिश कर रही हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

कोल्ड चेन रूम बंद होने से टीकाकरण कार्यक्रम ठप है। इसका सीधा असर ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों में चिंता है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो बच्चों और माताओं की सेहत पर गंभीर जोखिम बढ़ सकता है।

क्या गलत क्या सही ?

अब क्या सही है और क्या गलत ये तो हम नहीं बता सकते लेकिन इतना जरूर बतातें चलें कि आशा कार्यकर्ताएं अनेकों स्वास्थ्य सम्बन्धी सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की पहली सीढ़ी होतीं हैं, चाहे बच्चे को लेकर हो या माताओं को लेकर, सभी आधारभूत नीतियों का लाभ आशा कार्यकर्ता के माध्यम से ही पंहुचता है. कोरोना काल में आशा कार्यकर्ताओं कि भूमिका किसी से छुपी नहीं है. भारत के लगभग सभी राज्यों में आशा कार्यकर्ताओं का वेतन 10 हजार से भी कम होता है , आशा कार्यकर्ताओं का कोई निश्चित अवकाश भी नहीं होता है. अब आप ही बताइये , क्या सही है और क्या गलत ?

प्रशासन की प्रतिक्रिया

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है और समाधान के प्रयास जारी हैं। हालांकि, आशा कार्यकर्ता लिखित आश्वासन और स्पष्ट समय-सीमा की मांग पर अड़ी हैं—इसी वजह से धरना समाप्त नहीं हो रहा।

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