CIA बना रही जैविक हथियार? कोविड वैक्सीन बनाने वाले वैज्ञानिक का बड़ा दावा, जानिए क्या है बायोवेपन

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है. अमेरिका के चर्चित इम्यूनॉलजिस्ट डॉ. रॉबर्ट मलोन ने दावा किया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA गुप्त रूप से जैविक हथियार यानी बायोवेपन विकसित कर रही है. इस दावे के बाद दुनिया भर में बायोलॉजिकल वेपन को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
डॉ. मलोन वही वैज्ञानिक हैं जिन्हें कोविड-19 के खिलाफ mRNA वैक्सीन टेक्नोलॉजी के विकास में अहम योगदान देने का श्रेय दिया जाता है. उन्होंने अपने एक लेख में कहा कि उन्होंने सरकार के कुछ डिक्लासिफाइड दस्तावेज देखे हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि बायोलॉजिकल हथियारों पर काम किया जा रहा है.
हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई बहस जरूर शुरू हो गई है.
क्या होता है बायोवेपन?
बायोलॉजिकल वेपन यानी जैविक हथियार ऐसे हथियार होते हैं जो किसी जीवित सूक्ष्मजीव या उसके जहर से बनाए जाते हैं. इनमें आमतौर पर वायरस, बैक्टीरिया, फंगस या टॉक्सिन का इस्तेमाल किया जाता है.
इनका मकसद इंसानों, जानवरों या फसलों में गंभीर बीमारी फैलाना या बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाना होता है. यही कारण है कि इन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में गिना जाता है.
कैसे तैयार किए जाते हैं जैविक हथियार?
जैविक हथियार आमतौर पर लेबोरेटरी में तैयार किए जाते हैं. वैज्ञानिक लैब में वायरस, बैक्टीरिया या अन्य माइक्रोब को विकसित करते हैं और उन्हें इस तरह मॉडिफाई किया जाता है कि वे तेजी से बीमारी फैला सकें.
कई मामलों में ऐसे कीड़े या जीव भी तैयार किए जाते हैं जो बीमारी फैलाने का काम करें. आसान शब्दों में समझें तो इसमें बंदूक की जगह जीव और बारूद की जगह जहर का इस्तेमाल होता है.
क्यों खतरनाक माने जाते हैं बायोवेपन?
बायोवेपन बनाने की लागत अपेक्षाकृत कम होती है, लेकिन इसका असर बहुत व्यापक और लंबे समय तक रह सकता है. एक बार अगर कोई खतरनाक वायरस या बैक्टीरिया फैल जाए तो उसे रोकना बेहद मुश्किल हो सकता है.
इसी वजह से दुनिया के कई देशों ने जैविक हथियारों के निर्माण और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समझौते भी किए हैं.
