डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड गिरावट पर, आम आदमी की जेब पर कैसे पड़ेगा असर?

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता जा रहा है। शुक्रवार को रुपया करीब ₹96.2 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह गिरावट जारी रहती है तो इसका असर सीधे आम लोगों के खर्चों पर दिखाई दे सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, विदेश में पढ़ाई का खर्च बढ़ सकता है और मोबाइल-लैपटॉप जैसे इम्पोर्टेड सामान भी महंगे हो सकते हैं।
आखिर रुपया कमजोर क्यों हो रहा है?
रुपये पर सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की वजह से आया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है और इसकी पेमेंट डॉलर में होती है। ऐसे में जब डॉलर मजबूत होता है तो भारत को उसी तेल के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
मान लीजिए पहले 1 डॉलर की कीमत ₹83 थी और अब यह ₹96 हो गई है। अगर भारत 100 मिलियन डॉलर का तेल खरीदता है तो पहले इसकी कीमत लगभग ₹830 करोड़ पड़ती थी, लेकिन अब वही खरीद ₹960 करोड़ से ज्यादा की हो जाती है।
पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर असर
कमजोर रुपये का सबसे पहला असर तेल की कीमतों पर पड़ता है। तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ती है और इसका असर धीरे-धीरे खाने-पीने की चीजों, सब्जियों और रोजमर्रा के सामान तक पहुंच जाता है।
यानी आने वाले समय में आम लोगों का घरेलू बजट और दबाव में आ सकता है।
मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक्स हो सकते हैं महंगे
भारत बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी आयात करता है। ऐसे में कमजोर रुपया स्मार्टफोन, लैपटॉप, गेमिंग कंसोल, कैमरा और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान को महंगा बना सकता है।
कई कंपनियां आयात लागत बढ़ने पर कीमतें बढ़ा सकती हैं।
विदेश यात्रा और पढ़ाई होगी और महंगी
विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। अगर किसी यूनिवर्सिटी की फीस $40,000 है तो पहले ₹83 प्रति डॉलर के हिसाब से यह करीब ₹33 लाख पड़ती थी। अब यही फीस लगभग ₹38 लाख से ज्यादा हो सकती है।
सिर्फ फीस ही नहीं, बल्कि विदेश में रहने, खाने और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी बढ़ जाता है क्योंकि सब कुछ विदेशी मुद्रा में भुगतान होता है।
विदेश घूमने जाने वाले लोगों के लिए भी होटल, फ्लाइट और शॉपिंग पहले से ज्यादा महंगी हो सकती है।
किन सेक्टर्स को फायदा?
हर सेक्टर को नुकसान नहीं होता। आईटी और फार्मा जैसी एक्सपोर्ट आधारित कंपनियों को कमजोर रुपये से फायदा मिल सकता है।
इन कंपनियों की कमाई डॉलर में होती है। जब डॉलर को रुपये में बदला जाता है तो कंपनियों की आय ज्यादा दिखाई देती है। इसी वजह से कई बार रुपये में गिरावट के दौरान आईटी कंपनियों के शेयर मजबूत बने रहते हैं।
RBI क्या कर रहा है?
भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI ने बाजार में डॉलर बेचकर रुपये को सपोर्ट दिया है। भारत के पास करीब 690 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, जिसे आर्थिक सुरक्षा कवच माना जाता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं या वैश्विक तनाव जारी रहता है तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब?
रुपये की कीमत सिर्फ शेयर बाजार या फॉरेक्स मार्केट की खबर नहीं है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है।
कमजोर रुपया मतलब महंगा आयात, बढ़ती महंगाई, महंगा पेट्रोल और बढ़ता घरेलू खर्च। यही वजह है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर पूरी दुनिया की नजर रहती है।
