दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, जननीति भारत पार्टी का ऐलान

पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने आखिरकार अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने ‘जननीति भारत’ नाम से नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की है। दिव्या मित्तल ने कहा कि उनकी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरेगी।
दिव्या ने सोशल मीडिया के जरिए पार्टी और उसकी विचारधारा की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राजनीति में आम लोगों की आवाज और जरूरतों को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए।
जननीति भारत के तीन वचन
दिव्या मित्तल ने पार्टी के तीन प्रमुख वचन बताए हैं।
पहला वचन — जन से नीति और नीति से भारत
उनके मुताबिक नीतियां बनाते समय आम लोगों की जरूरत और उनके अनुभवों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
दूसरा वचन — हर फैसला जरूरत देखकर
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में जाति, धर्म या प्रभाव के बजाय वास्तविक जरूरत को आधार बनाया जाना चाहिए।
तीसरा वचन — जरूरत से फैसला, फैसले में बराबरी
दिव्या ने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और सभी लोगों की समान भागीदारी पर जोर दिया।
जनता की भागीदारी पर जोर
दिव्या मित्तल ने कहा कि देश में राजनीतिक दलों की कमी नहीं है, लेकिन आम लोगों की समस्याओं को सुनने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में जनता की भागीदारी से फैसले लेने की कोशिश होगी।
उन्होंने किसानों, छोटे व्यापारियों, युवाओं और महिलाओं की समस्याओं को नीतियों का आधार बनाने की बात कही। महिलाओं की सुरक्षा के लिए तकनीक के इस्तेमाल का सुझाव भी दिया।
सरकारी कामकाज का जनता को मिले हिसाब
दिव्या ने कहा कि लोगों को यह पता होना चाहिए कि उनके गांव या इलाके में कौन-सा काम हो रहा है, उस पर कितना पैसा खर्च हो रहा है और काम कब तक पूरा होगा।
उन्होंने स्कूल, अस्पताल, सड़क और राशन जैसी सरकारी सेवाओं की जनता के जरिए निगरानी की व्यवस्था का सुझाव दिया। इसके लिए उन्होंने अच्छे काम को हरे, अधूरे काम को पीले और खराब काम को लाल रंग से दिखाने जैसी व्यवस्था की बात कही।
‘चलिए हिसाब मांगते हैं’ से शुरू हुई थी पहल
दिव्या मित्तल इससे पहले ‘चलिए हिसाब मांगते हैं’ के नारे के साथ अपनी राजनीतिक सक्रियता के संकेत दे चुकी थीं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर को अपनी कर्मभूमि बताया था।
उस समय उन्होंने कहा था कि जिन व्यवस्थाओं से दशकों से हिसाब नहीं बदला, उन्हीं के सहारे बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने स्कूल, सड़क, पुल और सरकारी जमीनों से जुड़े सवालों का हिसाब मांगने की बात कही थी।
आईएएस पद से इस्तीफे के बाद बढ़ी थी चर्चा
दिव्या मित्तल 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। उन्होंने 30 अगस्त को इस्तीफा दिया था, जिसे 15 सितंबर से मंजूर माना गया।
अपने प्रशासनिक करियर में वह मेरठ की संयुक्त मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्ध नगर की सीडीओ, यूपीसीडा की संयुक्त प्रबंध निदेशक और बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष जैसे पदों पर रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने संतकबीरनगर और मिर्जापुर की जिलाधिकारी के तौर पर भी काम किया।
इस्तीफे के बाद से ही उनके राजनीति में आने की चर्चाएं तेज थीं। अब उन्होंने जननीति भारत के जरिए इस चर्चा को आधिकारिक रूप दे दिया है।
2027 में यूपी की सियासत में नई चुनौती
दिव्या मित्तल की नई पार्टी अब 2027 के विधानसभा चुनाव में कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी और उसका संगठन किस तरह तैयार होगा, यह आगे साफ होगा। हालांकि, पार्टी के ऐलान के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई राजनीतिक पहल जरूर जुड़ गई है।
अब देखना होगा कि पूर्व नौकरशाह के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाली दिव्या मित्तल जननीति भारत को चुनावी राजनीति में कितना मजबूत आधार दे पाती हैं।
