पुलिस की नौकरी, 30 करोड़ की संपत्ति? देवास के हेड कॉन्स्टेबल पर लोकायुक्त की नजर

0
देवास हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान की 30 करोड़ की संपत्ति की लोकायुक्त जांच
देवास में हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान की संपत्तियों को लेकर लोकायुक्त जांच

देवास: एक तरफ सरकारी नौकरी और दूसरी तरफ करोड़ों की संपत्ति का शुरुआती आकलन… मध्य प्रदेश के देवास में हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान की संपत्तियों को लेकर लोकायुक्त की जांच चर्चा में है। शुरुआती जांच में उनकी संपत्तियों का आकलन करीब 30 करोड़ रुपये तक किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, यह अभी प्रारंभिक अनुमान है और इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

लोकायुक्त की जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि पुलिसकर्मी की ज्ञात आय और सामने आई संपत्तियों के बीच कितना अंतर है और इन संपत्तियों की खरीद के लिए रकम कहां से आई।

2002 में आरक्षक के पद पर हुई थी भर्ती

जानकारी के मुताबिक फिरोज खान की 2002 में मध्य प्रदेश पुलिस में आरक्षक के पद पर भर्ती हुई थी। नौकरी के दौरान उन्हें लंबे समय तक पुलिस अधिकारियों की गाड़ियां चलाने की जिम्मेदारी मिली।

बताया जा रहा है कि अलग-अलग जगह तबादले होने के बावजूद अधिकारियों के साथ अटैचमेंट के कारण वह लंबे समय तक देवास में ही पदस्थ रहे। अब उनकी संपत्तियों और आय के स्रोतों की जांच की जा रही है।

कृषि जमीन से लेकर मकान और प्लॉट तक जांच के घेरे में

लोकायुक्त की जांच में देवास के इटावा क्षेत्र और आसपास की कृषि जमीन, प्लॉट और मकानों की जानकारी जुटाई जा रही है।

शुरुआती पड़ताल में पत्नी, रिश्तेदारों और परिचित महिलाओं के नाम पर संपत्तियां खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आने की बात कही जा रही है। जांच एजेंसी इन संपत्तियों के दस्तावेज, वास्तविक बाजार मूल्य और खरीद में इस्तेमाल रकम के स्रोत की जांच कर रही है।

यानी जांच सिर्फ यह नहीं देख रही कि संपत्ति किसके नाम है, बल्कि यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसके पीछे पैसा किसका था और रकम कहां से आई।

देवास से इंदौर तक का सफर

फिरोज खान मूल रूप से उज्जैन के रहने वाले बताए जाते हैं। उनकी पहली पोस्टिंग देवास में हुई थी। करीब दो साल पहले उनका तबादला इंदौर किया गया।

वर्तमान में वह पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थ बताए जा रहे हैं। लोकायुक्त अब उनकी नौकरी के दौरान हुई आय और सामने आई संपत्तियों का मिलान कर रही है।

30 करोड़ का आंकड़ा अभी शुरुआती है

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 30 करोड़ रुपये का आंकड़ा अभी शुरुआती आकलन बताया जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि जांच पूरी हो चुकी है या इतनी संपत्ति अवैध साबित हो गई है।

लोकायुक्त संपत्तियों के दस्तावेज, उनकी वास्तविक कीमत, खरीद के समय इस्तेमाल की गई रकम और आय के स्रोतों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि कुल संपत्ति कितनी है और उसमें से कितनी संपत्ति ज्ञात आय के स्रोतों से मेल खाती है।

अब जांच के नतीजे पर नजर

फिलहाल देवास के हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान की संपत्तियों को लेकर लोकायुक्त की जांच जारी है। करीब 30 करोड़ रुपये की शुरुआती संपत्ति के आकलन ने जरूर कई सवाल खड़े किए हैं, लेकिन इन सवालों का अंतिम जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

अब देखना होगा कि दस्तावेजों और आय के मिलान के बाद लोकायुक्त की जांच में क्या तस्वीर सामने आती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *