इंदौर… वही शहर, जिसे देश का सबसे साफ शहर कहा जाता है,लेकिन इसी शहर में गंदे पानी ने एक दादी से उसका सबसे कीमती वक्त छीन लिया।

हम बात कर रहे हैं 70 साल की उर्मिला यादव की।
15 साल तक इंतज़ार किया…
घर में किलकारी गूंजी…
पोता आया…
और फिर कुछ ही महीनों में सब खत्म।
क्या हुआ था?
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में रहने वाली उर्मिला यादव को अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। हालत इतनी बिगड़ी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
इलाज चला, पैसे खर्च हुए, लेकिन उर्मिला को बचाया नहीं जा सका।
परिवार का साफ कहना है—
बीमारी की वजह थी नलों से आ रहा गंदा और बदबूदार पानी।
सिर्फ उर्मिला नहीं, पूरा इलाका बीमार
- उनका पोता भी उसी पानी से बीमार पड़ा
- इलाके के कई लोग उल्टी-दस्त से जूझते रहे
स्थानीय लोगों का कहना है कि
“पानी कई दिनों से गंदा आ रहा था, पाइप लाइन खुली पड़ी थी, शिकायतें की गईं… लेकिन किसी ने सुना ही नहीं।”
इलाज में खर्च हुए पैसे, मदद नहीं मिली
परिवार का दावा है कि इलाज में करीब 40 हजार रुपये खर्च हो गए।
ना समय पर प्रशासन आया,
ना किसी ने पानी की सप्लाई रोकी।
और इसी लापरवाही की कीमत उर्मिला को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
सरकार का बयान और मुआवज़ा
मामला बढ़ा, सवाल उठे, तब जाकर सरकार हरकत में आई।
मुख्यमंत्री ने ऐलान किया—
सवाल अब भी ज़िंदा हैं
- जब पानी गंदा आ रहा था, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- देश का सबसे साफ शहर कहलाने वाला इंदौर, पीने का साफ पानी क्यों नहीं दे पाया?
- क्या हर बार मौत के बाद ही सिस्टम जागेगा?
यह रिपोर्ट NDTV में प्रकाशित खबर पर आधारित है।
