रेल स्टॉपेज और शंकरपुर–भदौरा रेलवे स्टेशन को पूर्ण स्टेशन का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर सीधी जिले के भदौरा गांव में चल रहा उग्र आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया, रेलवे प्रशासन की ओर से मौके पर पहुंचे एडीआरएम (असिस्टेंट डिविजनल रेलवे मैनेजर) ने आंदोलनकारियों को लिखित आश्वासन दिया कि एक माह के भीतर इंटरसिटी ट्रेन के स्टॉपेज की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की।

चार घंटे तक ठप रहा रेल यातायात
जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल क्षेत्र भदौरा में महिलाओं सहित हजारों ग्रामीण रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। आंदोलन इतना उग्र हो गया कि करीब चार घंटे तक रेल यातायात पूरी तरह बाधित रहा। इस दौरान कई ट्रेनों को रास्ते में रोकना पड़ा और एक मालगाड़ी को भी प्रदर्शनकारियों ने लाल झंडा दिखाकर रोक दिया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कई थानों का पुलिस बल मौके पर तैनात किया और वरिष्ठ अधिकारी लगातार निगरानी करते रहे।

ADRM ने दिया लिखित पत्र
एडीआरएम द्वारा सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि भदौरा क्षेत्र की मांगों को रेलवे प्रशासन गंभीरता से ले रहा है।
पत्र में स्पष्ट किया गया कि:
- इंटरसिटी ट्रेन के स्टॉपेज की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया एक महीने में पूरी की जाएगी
- स्टेशन से जुड़ी अन्य मांगों पर भी चरणबद्ध तरीके से विचार किया जाएगा
लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने रेलवे ट्रैक खाली कर दिया और आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
आंदोलन को बताया बड़ी जीत
स्थानीय नेता आनंद सिंह दद्दुआ ने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि यह संघर्ष हजारों लोगों की जरूरतों से जुड़ा था,उन्होंने कहा कि भदौरा और आसपास के गांवों के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए रेल सेवाओं पर निर्भर हैं, लेकिन स्टॉपेज न होने से उन्हें भारी परेशानी होती थी।
उन्होंने कहा कि अब रेलवे से मिला लिखित आश्वासन क्षेत्र के लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण है।
आगे की नजर रेलवे पर
फिलहाल ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में स्टॉपेज लागू नहीं हुआ तो आंदोलन दोबारा तेज किया जाएगा, अब सबकी नजर रेलवे प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।
