देश के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के बीच इन दिनों एक ही सवाल घूम रहा है –

UGC के नए नियम आखिर हैं क्या और इन पर इतना बवाल क्यों मचा है?
UGC यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने साल 2026 के लिए कुछ नए नियम लागू करने की घोषणा की है, इनका नाम रखा गया है –
Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026.
सरल भाषा में कहें तो UGC का दावा है कि ये नियम कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ में जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए हैं।
लेकिन जैसे ही ये नियम सामने आए, जनरल कैटेगरी के छात्रों में नाराज़गी फैल गई। कई जगह प्रदर्शन शुरू हो गए और मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

आखिर नए नियमों में है क्या?
UGC के नए नियमों के मुताबिक अब हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में कुछ चीजें अनिवार्य होंगी।
हर संस्थान में बनेंगे –
- Equal Opportunity Centre (EOC)
- Equity Committee
- 24 घंटे की हेल्पलाइन और शिकायत पोर्टल
- एक अलग Equity Squad
इन समितियों में SC, ST, OBC, महिला और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
अगर किसी छात्र को लगे कि उसके साथ जाति के आधार पर भेदभाव हुआ है तो वह सीधे शिकायत दर्ज कर सकता है।UGC ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करता तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
यहां तक कि फंड रोकने और मान्यता रद्द करने का अधिकार भी रखा गया है।
फिर विरोध क्यों हो रहा है?
अब कहानी का दूसरा हिस्सा सुनिए,
जनरल कैटेगरी के छात्रों का कहना है कि ये नियम सिर्फ SC-ST-OBC वर्ग के लिए सुरक्षा कवच बनाते हैं।
जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए इसमें कोई खास प्रावधान नहीं रखा गया।
छात्रों का डर ये है कि,
अगर कोई शिकायत झूठी हुई तो भी पहले आरोपी को दोषी मान लिया जाएगा, इससे कैंपस में डर का माहौल बन सकता है।
कुछ छात्र संगठनों ने कहा कि:
“भेदभाव रोकने के नाम पर एक नया भेदभाव पैदा किया जा रहा है।”
उनका यह भी कहना है कि यह नियम संविधान के समानता के अधिकार यानी अनुच्छेद 14 और 15 के खिलाफ हैं, क्योंकि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?

इन नियमों के खिलाफ एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है
याचिका में कहा गया है कि UGC के नियम एकतरफा हैं और सभी वर्गों को समान सुरक्षा नहीं देते
अब देश की सबसे बड़ी अदालत तय करेगी कि ये नियम संविधान के दायरे में आते हैं या नहीं।
सरकार और UGC का क्या कहना है?
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और UGC दोनों का कहना है कि इन नियमों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है
सरकार का तर्क है कि-
देश के कई विश्वविद्यालयों में आज भी जाति आधारित भेदभाव की शिकायतें आती हैं,इन्हीं शिकायतों को रोकने के लिए ये नियम बनाए गए हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि:
- किसी के साथ अन्याय नहीं होगा
- हर शिकायत की निष्पक्ष जांच होगी
- नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा
सोशल मीडिया से लेकर कैंपस तक बहस
UGC के नियमों पर बहस अब कॉलेजों की दीवारों से निकलकर सोशल मीडिया तक पहुंच गई है।
कुछ लोग कह रहे हैं:
“ये सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम है।”
तो कुछ का कहना है:
“यह जनरल कैटेगरी के छात्रों को निशाना बनाने जैसा है।”
देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र धरने पर बैठे हैं। कहीं पोस्टर लगे हैं तो कहीं रैलियां निकल रही हैं।
कुमार विश्वास की पतिक्रिया
इस मुद्दे पर कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया भी सामने आई है जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है
आगे क्या होगा?
फिलहाल यह साफ नहीं है कि ये नियम बदले जाएंगे या इसी रूप में लागू रहेंगे, अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के अगले फैसले पर टिकी है।
