पेपर लीक पर MP विधानसभा में घमासान, हंगामे के बीच कई विधेयक पारित

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सदन के अंदर और बाहर जमकर सियासी घमासान देखने को मिला। एक तरफ समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहे, तो दूसरी तरफ पेपर लीक और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना दिया। भारी हंगामे और दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बीच सरकार ने UCC समेत कई अहम विधेयक पारित करा लिए।
UCC विधेयक पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने
सदन में मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 पेश होते ही कांग्रेस ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण का मुद्दा उठाया।
कांग्रेस नेताओं ने अल्पसंख्यकों के अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 29 का हवाला देते हुए विधेयक की विस्तृत समीक्षा की मांग की। कांग्रेस का आरोप था कि सरकार जल्दबाजी में कानून ला रही है और इसे प्रवर समिति में भेजकर विस्तार से चर्चा कराई जानी चाहिए।
वहीं सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए UCC को सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रवर समिति की मांग खारिज, सदन में जोरदार हंगामा
UCC विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की विपक्ष की मांग खारिज होने के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामा इतना बढ़ा कि विधानसभा की कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा। बाद में सरकार ने अपने बहुमत के आधार पर विधेयक को पारित करा लिया।
बहस के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने व्यवस्था का सवाल उठाया। वहीं भाजपा विधायक सीताशरण शर्मा ने कांग्रेस पर संविधान की बात करने लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को नहीं मानने का आरोप लगाया।
पेपर लीक पर CM कक्ष के बाहर धरने पर बैठी कांग्रेस
दिनभर की कार्यवाही के बाद सियासी टकराव पेपर लीक के मुद्दे पर और बढ़ गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा कांग्रेस ने विधानसभा में उठाने की कोशिश की।
इस पर चर्चा की अनुमति नहीं मिलने से नाराज नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस विधायकों ने केंद्र और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और छात्रों के समर्थन में कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार युवाओं और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। उमंग सिंघार ने दिल्ली में छात्रों के समर्थन में हुए प्रदर्शन और राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दिल्ली से लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा तक छात्रों के सम्मान और न्याय की लड़ाई लड़ती रहेगी।
हंगामे के बीच कई अहम विधेयकों को मंजूरी
विधानसभा में राजनीतिक हंगामे के बीच सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया। मध्य प्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक-2026 के तहत राज्य सरकार को राजमार्गों के विकास, रखरखाव और संचालन के लिए यूजर फीस तय करने और वसूलने का अधिकार मिलेगा।
मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता)-2026 भी पारित की गई। इसके तहत निर्धारित शर्तों के साथ संस्थानों को 24 घंटे और सातों दिन संचालित करने का रास्ता साफ होगा। कर्मचारियों की ड्यूटी और कार्य अवधि को लेकर भी नए प्रावधान किए गए हैं।
फायर सेफ्टी से लेकर उद्योगों तक नए प्रावधान
फायर सेफ्टी से जुड़े नए प्रावधानों के तहत मल्टीस्टोरी इमारतों के लिए हर साल फायर सेफ्टी NOC लेना अनिवार्य करने और नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की व्यवस्था की गई है। जरूरत के अनुसार नए फायर स्टेशन स्थापित करने का भी प्रावधान है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े संशोधन के जरिए उद्योगों को मिलने वाली मंजूरियों की प्रक्रिया सरल करने की तैयारी है। इसके लिए राज्य और जिला स्तर पर नोडल एजेंसियां बनाई जाएंगी और संबंधित अधिकारियों को उद्योग प्रस्तावों से जुड़ी जानकारी तय समय के भीतर उपलब्ध करानी होगी।
इसके अलावा उज्जैन में धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़ा संशोधन भी पारित किया गया। वैट और उपकर कानूनों से संबंधित संशोधन विधेयकों को भी विधानसभा की मंजूरी मिल गई।
कुल मिलाकर मानसून सत्र का दूसरा दिन विधायी कामकाज से ज्यादा सियासी टकराव के नाम रहा। UCC को लेकर सदन के अंदर सत्ता और विपक्ष भिड़े, जबकि पेपर लीक और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा विधानसभा के गलियारों से होते हुए मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरने तक पहुंच गया। कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि वह आने वाले दिनों में भी युवाओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश जारी रखेगी।
