‘देश का दिल’ या डर का साया? मध्य प्रदेश में महिला और बाल अपराधों की चिंताजनक तस्वीर

मध्य प्रदेश को अक्सर उसकी सांस्कृतिक विरासत, भौगोलिक स्थिति और विकास परियोजनाओं के कारण ‘देश का दिल’ कहा जाता है। लेकिन इसी राज्य से आने वाले अपराध के आंकड़े एक ऐसी तस्वीर पेश कर रहे हैं, जो समाज और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर वर्गों के खिलाफ बढ़ते अपराध यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या विकास के दावों के बीच आम नागरिक वास्तव में सुरक्षित हैं?
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) और राज्य पुलिस के हालिया आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश महिला और बाल अपराधों के मामलों में देश के शीर्ष राज्यों में बना हुआ है। कुछ श्रेणियों में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन जमीनी हालात अब भी डराने वाले हैं।
बुजुर्गों और आदिवासियों के खिलाफ अपराध में MP सबसे आगे
NCRB के आंकड़ों के मुताबिक बुजुर्गों के खिलाफ अपराध के मामलों में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ 5,875 मामले दर्ज किए गए। वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के खिलाफ अपराधों में भी प्रदेश देश में शीर्ष पर रहा, जहां 3,165 केस दर्ज हुए।
अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के खिलाफ अपराधों में भी मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में 7,765 मामले दर्ज किए गए, जबकि उत्तर प्रदेश 14,642 मामलों के साथ पहले नंबर पर रहा।
दुष्कर्म और दहेज हत्या के आंकड़े बढ़ा रहे चिंता
महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बात करें तो मध्य प्रदेश दुष्कर्म के मामलों में देश में चौथे स्थान पर है। साल 2024 में राज्य में 3,061 रेप केस दर्ज किए गए। इस सूची में राजस्थान पहले, उत्तर प्रदेश दूसरे और महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर रहा।
दहेज हत्या के मामलों में भी मध्य प्रदेश की स्थिति बेहद खराब है। वर्ष 2024 में प्रदेश में 450 दहेज हत्या के मामले सामने आए, जो बिहार के बाद देश में दूसरे सबसे ज्यादा हैं।
सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के साथ यौन शोषण के मामलों में भी मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है। NCRB के अनुसार राज्य में 65 मामले दर्ज किए गए।
भोपाल की अपराध दर राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी
मध्य प्रदेश में महिला और बाल अपराध : राजधानी भोपाल में अपराधों में तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज होने के बावजूद स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। शहर की अपराध दर प्रति लाख आबादी पर 801.1 है, जबकि राष्ट्रीय औसत 418.9 है। यानी भोपाल की अपराध दर देश के औसत से लगभग दोगुनी है।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में मध्य प्रदेश अब भी देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है। प्रदेश में हर दिन औसतन 90 से ज्यादा मामले दर्ज हो रहे हैं।
इंदौर में बढ़ रहा किशोर अपराध
इंदौर से सामने आए आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। साल 2024 में शहर में किशोर अपराध के 173 मामले दर्ज किए गए। इससे पहले 2022 में यह संख्या 211 और 2023 में 141 थी। यानी एक साल की गिरावट के बाद फिर से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
देश के 19 महानगरों में इंदौर किशोर अपराध के मामलों में आठवें स्थान पर पहुंच चुका है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पकड़े गए 249 किशोर अपराधियों में एक भी निरक्षर नहीं था। इनमें कई आरोपी मैट्रिक और उच्च माध्यमिक तक पढ़े हुए थे। यह आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि किशोर अपराध अब केवल गरीबी और अशिक्षा से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है।
बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध तेजी से बढ़े
देशभर में बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। NCRB के अनुसार बच्चों के खिलाफ दर्ज साइबर अपराधों में 10 में से 9 मामलों का संबंध अश्लील कंटेंट के प्रसारण या प्रकाशन से है।
साल 2024 में देशभर में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1,87,702 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्षों की तुलना में 5.8 प्रतिशत अधिक हैं।
आखिर अड़चन कहां है?
विशेषज्ञों के अनुसार केवल कानून सख्त बना देने से अपराध नहीं रुकते। सबसे बड़ी समस्या मामलों की धीमी जांच, अदालतों में लंबित केस और कम कनविक्शन रेट है। कई मामलों में गवाह मुकर जाते हैं, पुलिस जांच में देरी होती है और सामाजिक दबाव के चलते आरोपी बच निकलते हैं।
इसी वजह से अपराधियों में कानून का डर कम होता जा रहा है।
क्या हो सकते हैं समाधान?
विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल पुलिस बल बढ़ाने से स्थिति नहीं सुधरेगी। इसके लिए सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव की जरूरत है।
सामाजिक सोच में बदलाव
बेटों की परवरिश में संवेदनशीलता और महिलाओं के प्रति सम्मान की शिक्षा जरूरी है। साथ ही बेटियों को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाना होगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत
महिला और बाल अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की संख्या और गति दोनों बढ़ानी होंगी ताकि पीड़ितों को जल्दी न्याय मिल सके।
सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर
सड़कों पर बेहतर लाइटिंग, CCTV कैमरे और सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
आंकड़ों को छिपाने नहीं, कार्रवाई करने की जरूरत
जब तक महिलाएं और बच्चियां बिना डर के सड़कों पर चल नहीं पाएंगी, तब तक विकास के सारे दावे अधूरे रहेंगे। मध्य प्रदेश को वास्तव में सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए हर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और कड़े कानून लागू करना जरूरी है।
राज्य की असली प्रगति तभी मानी जाएगी, जब आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करेगा।
