11 महीने से बकाया भुगतान नहीं मिलने पर आशा कार्यकर्ताओं का बड़ा फैसला, 23 जून से सरकारी काम का बहिष्कार

बिहार के कैमूर जिले में आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर दिया है। बिहार राज्य आशा कार्यकर्ता संघ के आह्वान पर भगवानपुर प्रखंड की आशा कार्यकर्ताओं ने 23 जून से सभी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के बहिष्कार की चेतावनी दी है।
यह फैसला भगवानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) परिसर में आयोजित बैठक में लिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता और आशा फैसिलिटेटर मौजूद रहे।
11 महीने से नहीं मिला भुगतान
बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि अगस्त 2025 से अब तक 11 महीने का प्रोत्साहन राशि और पारिश्रमिक का भुगतान लंबित है। उनका कहना है कि नियमित रूप से स्वास्थ्य सेवाएं देने के बावजूद उन्हें समय पर मेहनताना नहीं मिल रहा, जिससे आर्थिक परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
सरकार के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें दोहराईं। इनमें—
- अगस्त 2025 से लंबित 11 महीने का बकाया भुगतान तत्काल किया जाए।
- आशा कार्यकर्ताओं की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए।
- लंबित अन्य सेवा संबंधी मांगों पर भी जल्द निर्णय लिया जाए।
पहले भी सौंपा जा चुका है ज्ञापन
संघ का कहना है कि इन मांगों को लेकर पहले भी सरकार और स्वास्थ्य विभाग को विस्तृत ज्ञापन दिया गया था। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी वजह से अब आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया गया है।
23 जून से काम बहिष्कार की चेतावनी
आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो 23 जून से सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों का बहिष्कार किया जाएगा। उनका कहना है कि आंदोलन को आगे और तेज भी किया जा सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर
आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि काम बहिष्कार होता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, स्वास्थ्य सर्वेक्षण और अन्य सरकारी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और स्वास्थ्य विभाग की होगी।
