धर्मेंद्र कश्यप की ‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट से BJP में हलचल, PM मोदी के साथ वाली फोटो भी हटाई

उत्तर प्रदेश में भाजपा की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। धर्मेंद्र कश्यप ने फेसबुक पर सिर्फ तीन शब्द लिखे- ‘टाटा, बाय-बाय’।
इसके कुछ घंटे बाद उन्होंने अपने फेसबुक प्रोफाइल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लगी अपनी तस्वीर भी हटा दी और उसकी जगह अपनी सोलो फोटो लगा ली। राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा के ठीक बाद हुए इन दोनों बदलावों को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।
हालांकि, धर्मेंद्र कश्यप ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनकी पोस्ट और प्रोफाइल फोटो में बदलाव का भाजपा से उनके रिश्ते से कोई संबंध है या नहीं। भाजपा छोड़ने या समाजवादी पार्टी में जाने की भी उन्होंने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
राज्यसभा की लिस्ट में नहीं मिला नाम
भाजपा ने उत्तर प्रदेश की आठ राज्यसभा सीटों के लिए धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। इस सूची में धर्मेंद्र कश्यप का नाम नहीं है।
धर्मेंद्र कश्यप 2014 और 2019 में आंवला लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार नीरज मौर्य से हार का सामना करना पड़ा था।
राज्यसभा की उम्मीद, फिर ‘टाटा-बाय-बाय’
2024 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद धर्मेंद्र कश्यप के राज्यसभा जाने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में थी। उनकी बेटी कीर्ति कश्यप भी क्षेत्र में राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं।
लेकिन राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में नाम नहीं आने के बाद उनकी ‘टाटा-बाय-बाय’ पोस्ट ने इन चर्चाओं को फिर हवा दे दी। पोस्ट पर उनके समर्थकों और दूसरे राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं।
अखिलेश यादव से मुलाकातें भी चर्चा में
धर्मेंद्र कश्यप की हाल के दिनों में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकातें भी चर्चा में रही हैं। अब उनकी नई पोस्ट और PM मोदी के साथ तस्वीर हटाए जाने के बाद इन मुलाकातों को भी राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे भाजपा से दूरी का संकेत बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सिर्फ टिकट नहीं मिलने के बाद की नाराजगी मान रहे हैं।
BSP से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
धर्मेंद्र कश्यप ने 1995 में क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में राजनीति शुरू की थी। इसके बाद वह जिला पंचायत सदस्य बने।
2002 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता। बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और 2007 में दोबारा विधायक बने। सपा सरकार में उन्हें मंत्री भी बनाया गया।
2014 में उन्होंने सपा छोड़कर भाजपा का दामन थामा और आंवला से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने। 2019 में भी उन्होंने सीट बरकरार रखी, लेकिन 2024 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
अभी बड़ा सवाल- आगे क्या करेंगे धर्मेंद्र कश्यप?
राज्यसभा टिकट नहीं मिला, फेसबुक पर ‘टाटा-बाय-बाय’ लिखा और फिर PM नरेंद्र मोदी के साथ वाली तस्वीर भी हटा दी। इन घटनाओं ने यूपी की सियासत में धर्मेंद्र कश्यप के अगले कदम को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, अभी तक उनकी ओर से भाजपा छोड़ने या किसी दूसरी पार्टी में जाने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। ऐसे में फिलहाल उनके अगले राजनीतिक कदम का इंतजार है।
