चंपत राय ने पहली बार तोड़ी चुप्पी, बोले- SIT की अंतिम रिपोर्ट आने दीजिए, सच्चाई सामने आ जाएगी

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अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपों का सामना कर रहे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर श्रीरामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई “धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी” साझा करते हुए संकेत दिया कि संकट के समय ही व्यक्ति की वास्तविक परीक्षा होती है। इसके साथ ही उन्होंने राम भक्तों के नाम एक हस्तलिखित पत्र जारी कर अपने ऊपर लगे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी।

चंपत राय ने अपने पत्र में लिखा कि राम मंदिर के दानपात्र की गणना के दौरान हुई चोरी को लेकर उन पर निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन आरोपों के कारण उन्होंने अब तक मौन धारण किया था। उन्होंने राम भक्तों को भरोसा दिलाया कि जैसे ही विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट सामने आएगी, वह अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों और दुष्प्रचार का तथ्यात्मक जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि सच्चाई सभी के सामने आ जाएगी।

उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन का जिक्र करते हुए लिखा कि अक्टूबर 1991 में संगठन ने उन्हें अयोध्या भेजा था और पिछले करीब 45 वर्षों का उनका सार्वजनिक जीवन एक खुली किताब की तरह रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ काम किया है।

इधर, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अब जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। टीम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा आयोजित बड़े धार्मिक आयोजनों के खर्च की भी जांच कर रही है। जांच के तहत 22 जनवरी 2024 को हुए प्राण प्रतिष्ठा समारोह और 25 नवंबर 2025 को आयोजित ध्वजारोहण समारोह से जुड़े बिल, वाउचर और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर लगभग 113 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जिसमें करीब 8 हजार मेहमान शामिल हुए थे। वहीं ध्वजारोहण समारोह पर लगभग 10.12 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें करीब 6 हजार मेहमान मौजूद रहे। एसआईटी इन दोनों आयोजनों के खर्च और वित्तीय प्रक्रिया की विस्तार से जांच कर रही है।

इस बीच ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने भी मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार चंपत राय का इस पूरे मामले से कोई चारित्रिक संबंध नहीं हो सकता। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि चंपत राय अपने आसपास के लोगों को लेकर पर्याप्त सतर्क नहीं रहे। उन्होंने बताया कि चंपत राय के ड्राइवर के पास कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां और चाबियां थीं तथा उन्हें आशंका है कि उसी के जरिए पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नहीं होने के कारण निगरानी व्यवस्था कमजोर रही और अब जल्द ही एक CEO नियुक्त किया जाएगा।

उधर, फैजाबाद एंटी करप्शन कोर्ट ने इस मामले के तीन आरोपियों करुणेश पांडेय, अनुकल्प मिश्र और लवकुश मिश्र की एक दिन की पुलिस रिमांड मंजूर कर दी है। पुलिस ने सात दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने फिलहाल एक दिन की अनुमति दी है। अब पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर मामले के अन्य पहलुओं की जांच करेगी।

वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस्तीफा देने के बावजूद चंपत राय फिलहाल विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने रहेंगे। विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि जब तक किसी व्यक्ति पर लगे आरोप साबित नहीं हो जाते, तब तक उसके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं होगा।

सूत्रों के अनुसार, चंपत राय इस समय राम मंदिर के निकट स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम में एकांतवास कर रहे हैं और कड़ी सुरक्षा के बीच रह रहे हैं। उनसे मिलने के लिए भी विशेष अनुमति की आवश्यकता पड़ रही है।

इस पूरे विवाद पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले से करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं और यदि कथित गड़बड़ी की जानकारी पहले से थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

फिलहाल पूरे मामले में सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कई अहम खुलासे हो सकते हैं और आगे की कार्रवाई उसी के आधार पर तय होगी।

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