रीवा में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अस्पताल अधीक्षक हटाए गए, 7 सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

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Rewa Sanjay Gandhi Hospital

रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) में 22 वर्षीय प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। घटना के करीब सात दिन बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटा दिया है। उनकी जगह सर्जरी विभाग के HOD डॉ. प्रियंक शर्मा को अस्पताल का नया अधीक्षक बनाया गया है।

मामले में अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। वहीं, परिजनों के साथ कथित अभद्रता और आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद और बढ़ गया।

परिजनों से कथित अभद्रता का वीडियो वायरल

प्रसूता और नवजात की मौत के बाद अस्पताल में परिजनों और प्रबंधन के बीच विवाद की स्थिति बनी थी। इसी दौरान बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक पर परिजनों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगाए गए।

वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। मामले ने तूल पकड़ा तो प्रशासन ने अधीक्षक को पद से हटाने का फैसला लिया।

इलाज के दौरान हुई थी प्रसूता और नवजात की मौत

कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान उन्हें और उनके गर्भ में पल रहे बच्चे को समय पर उचित उपचार नहीं मिल सका।

हालांकि, मौत के वास्तविक कारण और किसी चिकित्सकीय लापरवाही की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन ने इसी उद्देश्य से मामले की विस्तृत जांच के लिए सात सदस्यीय कमेटी गठित की है।

7 सदस्यीय कमेटी करेगी पूरे मामले की जांच

जांच समिति प्रसूता और नवजात को दिए गए उपचार, मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पताल की व्यवस्थाओं और घटनाक्रम से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच करेगी।

इसके अलावा चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों और उस दौरान मौजूद डॉक्टरों एवं अन्य स्टाफ की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया है। कमेटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने 2 लाख रुपये की सहायता का किया ऐलान

मामले का मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी संज्ञान लिया है। सरकार की ओर से पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।

साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई है।

डीन की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

अधीक्षक को हटाए जाने के बाद अब श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

परिजनों और मामले से जुड़े लोगों की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी से जुड़े अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी या नहीं। फिलहाल डीन के खिलाफ किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

परिजन बोले- सिर्फ अधीक्षक हटाने से न्याय नहीं मिलेगा

कल्पना मिश्रा के परिजन प्रशासन की कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। परिवार का कहना है कि केवल अस्पताल अधीक्षक को पद से हटाने से उनकी बेटी और नवजात की मौत का न्याय नहीं होगा।

परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिवार की ओर से अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ धरने पर बैठने की चेतावनी भी दी गई है।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

फिलहाल इस मामले में एक तरफ सात सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है, तो दूसरी तरफ मृतका के परिवार की नाराजगी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में क्या सामने आता है और क्या कार्रवाई केवल अस्पताल अधीक्षक तक सीमित रहती है या इलाज, अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े अन्य लोगों की जिम्मेदारी भी तय होती है।

जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के लिए किसी स्तर पर चिकित्सकीय या प्रशासनिक लापरवाही जिम्मेदार थी या नहीं।

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