अमेरिका-ईरान जंग का नया फेज, अब ब्रिज, अस्पताल और फैक्ट्री निशाने पर, तस्वीरों में दिखी तबाही

तेहरान/वॉशिंगटन. पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान टकराव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. शुरुआती दौर में जहां सैन्य ठिकानों, न्यूक्लियर साइट्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा रहा था, वहीं अब हमलों का फोकस सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर शिफ्ट होता नजर आ रहा है. इसमें ब्रिज, अस्पताल, मेडिकल लैब और स्टील प्लांट जैसे अहम ठिकाने शामिल हैं. इस बदलाव को जंग का नया और चिंताजनक फेज माना जा रहा है.
एक महीने से ज्यादा समय से जारी है जंग
अमेरिका-ईरान जंग – पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष को एक महीने से अधिक समय हो चुका है. अमेरिका और इजरायल द्वारा लगातार किए जा रहे हमलों में पहले सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को टारगेट किया गया. लेकिन अब आम नागरिकों से जुड़े ढांचे भी हमलों की जद में आ रहे हैं.
रिपोर्ट्स के अनुसार, नए फेज में ईरान के कई रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है. इससे आम लोगों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है.
तेहरान-कराज को जोड़ने वाला ब्रिज बना निशाना
2 अप्रैल को हुए एक बड़े हवाई हमले में ईरान के सबसे ऊंचे पुल ‘B1 ब्रिज’ को निशाना बनाया गया. यह ब्रिज राजधानी तेहरान को पश्चिमी शहर कराज से जोड़ता है और ट्रांसपोर्ट के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है.
इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए. पुल को हुए नुकसान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जो जंग की भयावहता को दिखाती हैं.
मेडिकल रिसर्च सेंटर भी नहीं बचा
अमेरिका-ईरान जंग – ईरान के स्वास्थ्य मंत्री होसैन केरमनपुर के अनुसार, हमले में तेहरान स्थित पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ ईरान को भी भारी नुकसान पहुंचा है. यह एक प्रतिष्ठित मेडिकल रिसर्च सेंटर है, जिसकी स्थापना 1920 में हुई थी.
उन्होंने इस हमले को “अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा पर सीधा हमला” बताया है. इसके साथ ही ईरान ने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) और इंटरनेशनल कमिटी ऑफ रेड क्रॉस (ICRC) से हस्तक्षेप की अपील की है.
दवा फैक्ट्री और इंडस्ट्री भी टारगेट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘तौफीक दोरो’ नाम की दवा फैक्ट्री को भी हमले में निशाना बनाया गया. इसके अलावा स्टील प्लांट और अन्य इंडस्ट्रियल यूनिट्स को भी नुकसान पहुंचने की खबर है.
यह संकेत देता है कि अब जंग का असर सीधे तौर पर आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
अंतरराष्ट्रीय कानून पर उठे सवाल
1949 के जेनेवा कन्वेंशन के अनुसार, किसी भी जंग में सिविलियन टार्गेट्स पर हमला करना वॉर क्राइम की श्रेणी में आता है. लेकिन मौजूदा हालात में इन नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका के 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने एक पत्र जारी कर इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन बताया है.
ईरान का पलटवार, साइबर हमले शुरू
वहीं, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी आईटी कंपनियों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर साइबर हमले शुरू कर दिए हैं. इससे संघर्ष अब पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ साइबर वॉर में भी बदलता नजर आ रहा है.
