पहली फिल्म, इतना बड़ा किरदार! ‘हनुमान अंश’ में बाबा नीम करौली बने शोभिनव सत्या

Hanuman Ansh Film : किसी अनजान चेहरे का पहली ही फिल्म में एक ऐसी शख्सियत का किरदार निभाना, जिसे देशभर में लाखों लोग आस्था से देखते हैं, आसान नहीं होता। लेकिन फिल्म ‘हनुमान अंश’ में अभिनेता शोभिनव सत्या ने बाबा नीम करौली का किरदार निभाकर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा बढ़ रही है। फिल्म की कहानी और विषय के साथ-साथ इसके मुख्य अभिनेता शोभिनव सत्या भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। खास बात यह है कि यह शोभिनव की बतौर अभिनेता पहली फिल्म है।
कौन हैं शोभिनव सत्या?
शोभिनव सत्या लखनऊ के रहने वाले हैं। उन्होंने लखनऊ के Opulent School of Acting and Films से एक्टिंग और फिल्ममेकिंग की ट्रेनिंग ली। इसके बाद उन्होंने पुणे स्थित Film and Television Institute से भी पढ़ाई की।
हालांकि, कैमरे के सामने यह उनकी पहली बड़ी पारी है, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री उनके लिए बिल्कुल नई नहीं है। अभिनय में आने से पहले शोभिनव पर्दे के पीछे काम कर चुके हैं और बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर कई प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे हैं।
IMDb पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह 2019 में आई ‘Ragini MMS Returns’ से असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर जुड़े थे। इसके बाद 2020 की ‘Happily Ever After’ में उन्होंने स्क्रिप्ट और कंटिन्यूटी विभाग में काम किया।
वह लोकप्रिय टीवी शो ‘CID’ का भी हिस्सा रहे हैं। साल 2025 में उन्होंने शो के कुछ एपिसोड्स में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया।
यानी कैमरे के पीछे काम करने के बाद शोभिनव सत्या को अब कैमरे के सामने आने का मौका मिला और वह भी सीधे बाबा नीम करौली जैसे चुनौतीपूर्ण किरदार के साथ।
पहली ही फिल्म में बाबा नीम करौली का किरदार
‘हनुमान अंश’ में शोभिनव सत्या ने बाबा नीम करौली का किरदार निभाया है। किसी वास्तविक आध्यात्मिक व्यक्तित्व को पर्दे पर उतारना किसी भी अभिनेता के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है।
फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने भी इस किरदार के लिए किसी बड़े स्टार को चुनने के बजाय नए चेहरे को मौका देने का फैसला किया।
निर्देशक के मुताबिक, उनकी कोशिश थी कि बाबा नीम करौली के किरदार के साथ दर्शकों के मन में किसी अभिनेता की पहले से बनी हुई छवि न जुड़े। उनका मानना था कि इस भूमिका के लिए ऐसा चेहरा चाहिए, जिसे दर्शक पहले से किसी खास फिल्मी छवि में न देखते हों।
यही वजह रही कि शोभिनव सत्या को इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चुना गया।
धार्मिक फिल्म बनाना था बड़ी जिम्मेदारी
निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने इस फिल्म को लेकर कहा कि धार्मिक विषय पर फिल्म बनाना सिर्फ कहानी कहने का काम नहीं है, बल्कि इसके साथ आस्था और संवेदनशीलता भी जुड़ी होती है।
उनके मुताबिक, किसी धार्मिक व्यक्तित्व पर फिल्म बनाते समय रिसर्च जरूरी है, लेकिन केवल रिसर्च काफी नहीं होती। उस विषय के प्रति सम्मान और श्रद्धा भी जरूरी है।
इसी सोच के साथ फिल्म की कास्टिंग और शूटिंग के माहौल पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
फिल्म के सेट पर रोज होती थी आरती
‘हनुमान अंश’ की शूटिंग के दौरान सेट का माहौल भी सामान्य फिल्म सेट से कुछ अलग रखा गया था।
निर्देशक के मुताबिक, पूरी टीम ने इस प्रोजेक्ट के दौरान सात्विक माहौल बनाए रखने की कोशिश की। सेट पर भोजन पूरी तरह शाकाहारी रखा गया। इसके अलावा रोज आरती होती थी और हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जाता था।
फिल्म से जुड़े लोगों का मानना था कि बाबा नीम करौली जैसे आध्यात्मिक किरदार को निभाने वाले कलाकार के लिए केवल बाहरी हाव-भाव की नकल करना पर्याप्त नहीं है। किरदार की भावना को समझना और उसके अनुरूप खुद को ढालना भी उतना ही जरूरी है।
शोभिनव के लिए आसान नहीं था यह किरदार
एक तरफ यह शोभिनव सत्या की पहली फिल्म थी और दूसरी तरफ उन्हें ऐसी शख्सियत का किरदार निभाना था, जिनसे बड़ी संख्या में लोग भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से जुड़े हुए हैं।
ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यही रही होगी कि वह बाबा नीम करौली के व्यक्तित्व को पर्दे पर किस तरह पेश करें, ताकि किरदार फिल्मी कम और वास्तविक भावनाओं के करीब नजर आए।
‘हनुमान अंश’ के जरिए शोभिनव ने बतौर अभिनेता अपनी शुरुआत तो कर दी है, लेकिन अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बाबा नीम करौली की भूमिका के बाद उनके करियर को आगे किस तरह के किरदार मिलते हैं।
फिलहाल फिल्म की चर्चा के बीच शोभिनव सत्या का नाम भी तेजी से लोगों तक पहुंच रहा है और उनकी पहली फिल्म ने उन्हें एक ऐसी भूमिका दे दी है, जिसे लंबे समय तक याद किया जा सकता है।
