भारत का सबसे शातिर चोर. नकली जज बनकर 40 दिन तक सुनाता रहा फैसले, धनीराम मित्तल की हैरान करने वाली कहानी

फिल्मों में आपने कई चालाक चोरों की कहानियां देखी होंगी. लेकिन भारत में एक ऐसा शख्स हुआ जिसकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. इस व्यक्ति का नाम था धनीराम मित्तल, जिसे भारत का ‘सुपर नटवरलाल’ कहा जाता था.
धनीराम मित्तल अपने कारनामों के लिए इतना मशहूर हुआ कि उसने न सिर्फ हजारों गाड़ियां चोरी कीं, बल्कि नकली जज बनकर कोर्ट में फैसले तक सुनाने लगा.
1000 से ज्यादा गाड़ियां चुराने का आरोप
धनीराम मित्तल का जन्म हरियाणा के भिवानी में हुआ था. उसने बीएससी और एलएलबी की पढ़ाई की थी. कहा जाता है कि वह हैंडराइटिंग एक्सपर्ट और ग्राफोलॉजिस्ट भी था. इसी कला का इस्तेमाल करके वह किसी भी व्यक्ति के हस्ताक्षर की नकल कर सकता था.
नौकरी न मिलने के बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा. रिपोर्ट्स के मुताबिक उसने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और राजस्थान में 1000 से ज्यादा गाड़ियां चोरी कीं. वह फर्जी दस्तावेज बनाकर इन गाड़ियों को बेच देता था.
नकली जज बनकर सुनाए फैसले
धनीराम मित्तल का सबसे सनसनीखेज कारनामा 1970 के दशक में सामने आया. बताया जाता है कि उसने अखबार में पढ़ा कि झज्जर के एक एडिशनल जज के खिलाफ जांच चल रही है.
इसके बाद उसने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और खुद को झज्जर कोर्ट का जज बनाकर बैठ गया. कानून की पढ़ाई होने के कारण उसे अदालत की प्रक्रिया की अच्छी जानकारी थी.
बताया जाता है कि करीब 40 दिनों तक वह जज बनकर कोर्ट में बैठता रहा और 2470 मामलों की सुनवाई की. हत्या और रेप जैसे गंभीर मामलों को छोड़कर उसने ज्यादातर मामलों में आरोपियों को जमानत दे दी.

95 बार हुआ गिरफ्तार
धनीराम मित्तल को देश के सबसे शातिर अपराधियों में गिना जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार उसे करीब 95 बार गिरफ्तार किया गया, लेकिन वह हर बार किसी न किसी तरीके से बच निकलता था.
आखिरकार उसकी अंतिम गिरफ्तारी के बाद वह जेल में ही रहा और साल 2024 में जेल में उसकी मौत हो गई.

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